प्रेषक : सोनू कुमार
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा सादर प्रणाम ! मेरा नाम सोनू कुमार है, मैं 22 साल का सांवला रंग, मैं दिखने में मध्यम शरीर का हूँ। उस समय मैं दक्षिण भारत में पढ़ता था और अपने घर बिहार छुट्टियों में आया हुआ था।
यह मेरी पहली कहानी है। यह मेरे जीवन की सच्ची घटना है। बात 4 साल पहले की है जब मैं 18 साल का था। उस समय मेरा लंड साढ़े पाँच इन्च लंबा और ढाई इंच मोटा रहा होगा।
उस दिन दीदी के यहाँ किसी पूजा में गया था और मैंने सोचा था कि शाम तक लौट आऊँगा। लेकिन पूजा शाम में होने के कारण रुकना पड़ा। पूजा शाम को 7:30 तक खत्म हो चुकी थी तो सब रात के खाने की तैयारी में थे। मेहमानों की संख्या ज्यादा होने के कारण सारे कमरे भरे हुए थे। रात के 9 बज चुके थे और दिन के थकावट के कारण मुझे बहुत नींद आ रही थी तो मैं छत पर चला गया। वहाँ पर एक किनारे में एक बेड लगा था, और मुझे क्या चाहिये था।
मैं सोने के लिये लेट गया और मेरी आँख लग गई। दस मिनट बाद जब मेरी नींद खुली तो मेरे बाजू में कोई चादर ओढ़ कर सोया था, मैंने सोचा कि कोई मेहमान होगा। कुछ देर बाद वो मेरे से सट गया और उसकी चादर मेरे शरीर पर आ गई, तो मैंने भी थोड़ी ठंड होने के कारण चादर में आना सही समझा।
अभी 5 मिनट ही हुए थे कि वो मुझसे चिपक गया, उसके चिपकते ही मुझे झटका लगा, वो कोई लड़की थी, उसकी चूचियाँ मेरे शरीर में महसूस हो रही थी, टमाटर की तरह छोटी छोटी !
उसकी चूचियाँ मेरे शरीर में वासना का आग लगा चुकी थी और मेरा लंड तो उसकी चूतकी गर्मी पा कर खड़ा हो चुका था। अब मुझसे नहीं रहा गया और मैंने अपना एक हाथ उसकी टी-शर्ट में डाल दिया और उसकी चूचियाँ को छुआ फ़िर धीरे-धीरे दबाने लगा। उसकी चूचियाँ छोटे संतरे के आकार की थी।
जब उसने कुछ न कहा तो मैंने अपना दूसरे हाथ से उसका टी-शर्ट ऊपर उठा दिया और दोनों हाथ से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। अब वो भी गर्म हो चुकी थी, मैं अपना हाथ उसकी चूत पर ले गया और छुआ तो उसकी चूत गीली थी। फ़िर मैंने जल्दबाजी न करते हुए धीरे से अपना मुँह उसकी चूचियों पर ले गया और चूसना शुरु किया। कुछ देर में उसके मुँह से 'आ आह' सिसकारियाँ निकलने लगी।
अब मैं समझ चुका था कि वो चुदने के लिये तैयार है, मैंने धीरे से अपनी पैन्ट नीचे की और अपना लंड निकाल कर उसकी पैन्टी के ऊपर से ही चूत पर दबाने और रगड़ने लगा, तो उससे भी नहीं रहा गया और उसने अपनी पैन्टी उतार दी। अब मेरा लंड और उसकी चूत आपस मजे करने लगे। मैं उसके होंठ चूसने लगा और उसने अपने पैरों को मेरी कमर में लपेट दिया।
फ़िर उसने धीरे से चूत को थोड़ा ऊपर करके मेरे लंड को अपने चूत की छेद पर सेट करके दबाने लगी। उसकी चूत गीली थी।
मैंने उसके होंठ को चूसते हुए अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ा और एक जोर का झटका मारा और मेरे लंड का टोपा उसकी चूत में धंस गया, उसकी थोड़ी चीख निकली लेकिन मैंने अपने होंठों से उसके होंठों को दबा दिया।
अब मैंने एक और झटका मारा और लंड आधा उसकी चूत में चला गया। अब मैं 2 मिनट रुका, जब उसकी थोड़ा दर्द कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे उसे चोदना शुरु किया। अब वो भी धीरे धीरे अपनी कमर हिलाने लगी थी, मैंने अब अपनी गति बढ़ा दी और अब उसे भी चुदाई का असली मजा आने लगा था।
अब वो भी चूत उठा उठा कर मेरा पूरा लंड अपनी चूत में गड़प रही थी। वो मुझे कस के पकड़े हुए बोल रही थी- और जोर से ! और जोर से करो !
मैं और जोश से भर उठा। बीस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़े। मैंने उसकी चूत में दर्द डाल दिया था।
उस रात हमने 2 बार चुदाई की। सुबह 5 बजे वो बेड से उठी तो ठीक से चल नहीं पा रही थी फिर भी वो खुश थी। उसके बाद मैं घर चला आया। उसके एक साल बाद उसकी शादी हो गई। मैं उससे फिर कभी नहीं मिला।
आज तक मेर लंड प्यासा है कि कब कोई फिर मुझसे मिले। अब मुझे सेक्स की बहुत इच्छा होती है लेकिन कोई नहीं है, मैं बहुत अकेला हूँ।
मेरी सच्ची कहानी आपको कैसे लगी, जरुर बताएं !